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"गबन" मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित एक ऐसा उपन्यास है जो आज भी हर पाठक को अपने समय की सच्चाई से जोड़ देता है। यह उपन्यास भारतीय मध्यवर्ग की झूठी प्रतिष्ठा, सामाजिक दिखावा, और नैतिक संघर्ष को बहुत ही सटीकता से प्रस्तुत करता है।
कहानी के मुख्य पात्र रामनाथ और उसकी पत्नी जलपायी की ज़िंदगी में सब कुछ सही चल रहा होता है, लेकिन जलपायी की सुंदरता और महंगे गहनों के प्रति आकर्षण रामनाथ को ग़लत रास्तों की ओर ले जाता है। समाज में इज़्ज़त बचाने और बीवी की इच्छाएं पूरी करने के लिए वह सरकारी रकम का गबन (embezzlement) कर बैठता है। इसके बाद शुरू होता है आत्मग्लानि, भय और आत्मसुधार का सफर।
मनोवैज्ञानिक गहराई: कैसे एक आम इंसान अपने आत्मसम्मान और मोह के बीच फंस जाता है।
सामाजिक कटाक्ष: समाज के दिखावे और प्रतिष्ठा की बेड़ियाँ।
नैतिक शिक्षा: गलतियाँ इंसान को तोड़ती हैं, लेकिन सुधार की राह भी वही दिखाती हैं।
गबन केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भारतीय समाज की परतें खोलती एक दस्तावेज़ है जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। इस पुस्तक का हर पन्ना सोचने पर मजबूर करता है और जीवन के कई पहलुओं से रूबरू कराता है।
Indore, India
ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे जज़्बात लिख डाले हों। बहुत प्यारी कविताएं हैं।
Kanpur, India
क्या शानदार कविताएं हैं यार! एकदम दिल छू गईं।
Jamshedpur, India
Kavitaon ka ekdum asli touch mila. Na zyada mushkil, na zyada filmi – bas sahi feel.
Udaipur, India
Mujhe poetry zyada samajh nahi aati thi, lekin yeh book dil se connect ho gayi.
Hyderabad, India
हर अल्फाज़ में जादू है, हर मिसरा एक एहसास है। इस वेबसाइट ने मुझे शायरी से और गहरे जुड़ने का मौका दिया।
Aligarh, India
Roz ka hustle thoda side mein rakha aur yeh padh ke dil halka sa ho gaya. Khub likha hai.