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"Lifafa" – नाम जितना मासूम, किताब उतनी ही तीखी, विचारोत्तेजक और सच से लिपटी हुई। Ravish Kumar, जो कि भारत के सबसे ईमानदार और बेबाक पत्रकारों में से एक हैं, इस किताब में बताते हैं कि कैसे न्यूज़ चैनल्स अब सिर्फ एंकरों का तमाशा और सत्ता का प्रचार बनकर रह गए हैं।
किताब में शामिल हैं:
मीडिया की गिरती साख पर तीखा विश्लेषण
‘गोदी मीडिया’ शब्द का सटीक चित्रण
आम जनता की आवाज़ को दबाने की राजनीति
सत्ता और मीडिया की मिलीभगत के उदाहरण
लोकतंत्र, अभिव्यक्ति और नागरिकता की बात
"Lifafa" एक ऐसा दस्तावेज़ है जो हर उस पाठक को पढ़ना चाहिए जो जानना चाहता है कि उसके देश में सच्चाई कैसे छुपाई जाती है। यह किताब न केवल पत्रकारिता पर सवाल उठाती है, बल्कि पाठकों को अपने विचारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा भी देती है।
अगर आप टीवी न्यूज़ देखकर भ्रमित हो जाते हैं, या आपको लगता है कि अब कोई सच्ची रिपोर्टिंग नहीं बची — तो Lifafa आपके लिए एक आइना है।
Delhi, India
शायरी का ऐसा शानदार संग्रह बहुत कम जगह देखने को मिलता है। यहाँ की हर एक लाइन दिल को छू जाती है।
Gwalior, India
Bhai, kya likha hai! Roz ke stress ke baad padhna ek alag hi feeling deta hai.
Raipur, India
Poetry toh sab padhte hain, par ismein ek alag hi feel hai. Straight dil se.
Kanpur, India
क्या शानदार कविताएं हैं यार! एकदम दिल छू गईं।
Aligarh, India
Roz ka hustle thoda side mein rakha aur yeh padh ke dil halka sa ho gaya. Khub likha hai.
Hyderabad, India
हर अल्फाज़ में जादू है, हर मिसरा एक एहसास है। इस वेबसाइट ने मुझे शायरी से और गहरे जुड़ने का मौका दिया।